जिंदगी का सार

फिर वही सुबह और भीड़ भरी शाम, इक नया लक्ष्य, इक नया जाम वक़्त बीतता है और घेर लेता है मुझे आने वाले कल के मंजर का गुबार तुम्हारे अफ़साने सुनकर लगता है काबिल हूँ में, तुम्हारी वो बच्चो सी मुस्कान देखकर लगता है काबिल हूँ में पर ये शैतान, बेचैन मन दफ़न कर देता … Read more जिंदगी का सार

Saral Sa Jeevan

तुम सरल सी हो, आसान सी तुम बदल सी हो, आस्मां सी कठिन हो जरा सी, पर हल हो जाए वो मुश्किल हो पागलपन करती हो तुम, जैसे बच्चे नादाँ सी तुझपे हक़ है, परवाह है, तू हिस्सा है मेरा मेरे बेजान शरीर में, बहती हो तुम प्राण सी| – आशुतोष