जिंदगी का सार

jindagi ka saar quote poem Arman Amprovise

फिर वही सुबह और भीड़ भरी शाम,
इक नया लक्ष्य, इक नया जाम

वक़्त बीतता है और घेर लेता है मुझे
आने वाले कल के मंजर का गुबार

तुम्हारे अफ़साने सुनकर लगता है काबिल हूँ में,
तुम्हारी वो बच्चो सी मुस्कान देखकर लगता है काबिल हूँ में

पर ये शैतान, बेचैन मन दफ़न कर देता है मेरी उम्मीदे मेरी आशाएं
बनते बिगड़ते, अक्सर धूमिल होते सपने

उम्मीदे कायम रखना, सपनो को संजो के रखना
झेलना दुसरो की समझाइश का अम्बार,
शायद यही है जिंदगी का सार

फिर वही सुबह और भीड़ भरी शाम,
इक नया लक्ष्य, इक नया जाम

पीते जा, पीते जा, जीते जा, जीते जा

– अरमान माथुर

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