Saral Sa Jeevan

saral sa jeevan

तुम सरल सी हो, आसान सी
तुम बदल सी हो, आस्मां सी

कठिन हो जरा सी, पर हल हो जाए वो मुश्किल हो
पागलपन करती हो तुम, जैसे बच्चे नादाँ सी

तुझपे हक़ है, परवाह है, तू हिस्सा है मेरा
मेरे बेजान शरीर में, बहती हो तुम प्राण सी|

– आशुतोष

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